Tuesday, June 21, 2016

प्रार्थना पारिवारिक श्रापों से छुटकारे के लिए/Prayer for breaking Family curse

अधर्म में तीन बातें प्रमुख रूप से आती हैं और ये एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलता जाता है 
1. मूर्ति पूजा 
2. नशा खोरी 
3. व्यभिचार 
पढ़ो  निर्गमन 20 :4 -6 
4 “तुम्हें कोई भी मूर्ति नहीं बनानी चाहिए। किसी भी उस चीज़ की आकृति मत बनाओ जो ऊपर आकाश में या नीचे धरती पर अथवा धरती के नीचे पानी में हो। 5 किसी भी प्रकार की मूर्ति की पूजा मत करो, उसके आगे मत झुको। क्यों? क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ। मेरे लोग जो दूसरे देवताओं की पूजा करते हैं मैं उनसे घृणा करता हूँ। यदि कोई व्यक्ति मेरे विरुद्ध पाप करता है तो मैं उसका शत्रु हो जाता हूँ। मैं उस व्यक्ति की सन्तानों की तीसरी और चौथी पीढ़ी तक को दण्ड दूँगा। 6 किन्तु मैं उन व्यक्तियों पर बहुत कृपालू रहूँगा जो मुझसे प्रेम करेंगे और मेरे आदेशों को मानेंगे। मैं उनके परिवारों के प्रति सहस्रों पीढ़ी तक कृपालु रहूँगा।
प्रार्थना करो -
1. अपने और अपने परिवार के अधर्मों के लिए माफ़ी मांगों 
2 . पढ़ो - व्यवस्था विवरण 7:5
5 “तुम्हें इन राष्ट्रों के साथ यह करना चाहिएः तुम्हें उनकी वेदियाँ नष्ट करनी चाहिए और विशेष पत्थरों को टुकड़ों मे तोड़ डालना चाहिए। उनके अशेरा स्तम्भों को काट डालो और उनकी मूतिर्यों को जला दो!
3 . अपने घर की सभी समस्याओं की लिस्ट बनाओ 
4 . अब उन समस्यांओं को एक एक कर के तोड़ो 
फिर प्रार्थना करो -
हर श्राप या नकारात्मक बातें जो मेरे परिवार में हो रही हैं मैं उन सभी नकारात्मक बातों को येशु मसीह के नाम पर तोड़ देती हूँ।  उन्हें मैं अपने जीवन से और अपने परिवार के सदस्यों के जीवन से पूरी तरह उखाड कर फेंक देती हूँ। 
शैतान तुम मेरे पैरों के नीचे हो और मैं येशु के नाम पर तुम्हारी हर चाल को रद्द कर देती हूँ। 
मैं हर उस जड़ को जिसके द्वारा तुम मेरे परिवार को सताने का हक़ रखते हो उसे येशु के नाम पर नष्ट कर देती हूँ। मैं तुम्हे येशु के नाम पर आदेश देती हूँ कि मेरे परिवार को छोड़ कर तुरंत यहाँ से अपनी तमाम दुष्टात्माओं के साथ निकल जाओ। 
मैं येशु के नाम पर उसकी लहू की वाचा के द्वारा आशीषों की एक नयी वाचा अपने और अपने परिवार पर लागू करती हूँ जो-
जो मेरे परिवार को येशु के लहू में छिपाता है 
जो मेरे परिवार को परमेश्वर की हर आशीषों से भरता है 
जो मेरे परिवार को तमाम खुशियों से भरता है 
जो मेरे परिवार को शांति देता है 
जो मेरे परिवार को चंगाई देता है 
जो मेरे परिवार को आदर और सम्मान दिलाता है 
जो मेरे परिवार के लिए नए द्वार खोलता है 
मैं और मेरा परिवार येशु के लहू में पूरी तरह से सुरक्षित हैं 
पवित्र आत्मा की अगुवाई सदैव हमारे जीवनो पर रहे। 
अमीन 

Friday, June 10, 2016

धैर्य पवित्र आत्मा का फल है/

एकबार मैंने अपनी फेस बुक में स्थिर खड़े रहने और आशा का पीछा करते रहने के लिए लिखा |"यह सत्य है कि जीवन वास्तव में कठिन हो सकता है लेकिन अपने कल को जाने ना दो | बेस्ट अभी आने को है |"
इस पर मुझे मिली झूली प्रतिक्रियाएं मिली, कुछ इस बात से सहमत हुए कुछ नहीं |
अधिकतर लोग जब सफलता के करीब पहुँच रहें होते है हिम्मत खो बैठते है | अंतिम क्षण में चूक जाते हैं | लेकिन परमेश्वर हमसे ये उम्मीद नहीं करता है |
वह हमे जयवंत बुलाता है और धैर्य की आत्मा देता है |
पढ़ें गलातियों 5:22-23 लेकिन आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शांति, धैर्य, दया, भलाई, विश्वास, नम्रता और आत्म नियंत्रण है| ऐसे कामों के विरूद्ध कोई व्यवस्था नहीं है
धैर्य की क्या परिभाषा दोगे?
उन्होंने यह विचार क्यों नहीं पसंद किया कि परमेश्वर अभी भी उनके लिए काम कर रहा है और वह उनके जीवन में बेस्ट लायेगा?
इसके दो कारण हो सकते हैं
1 . वे परमेश्वर को जानते नहीं थे
2 . उनका जीवन अधिकतर असफलताओं से भरा था
धैर्य वह क्षमता और इच्छा है जो बिना शिकायत या परेशानी के मुश्किल या चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना सहजतापूर्वक करा सके|
पढ़ें रोमियो 5:3-4, इतना ही नहीं हम अपने क्लेशों में भी आनंदित होतें हैं क्योंकि यह जानते हैं कि क्लेश में धैर्य उत्पन्न होता है, तथा धैर्य से खरा चरित्र, और खरे चरित्र से आशा उत्पन्न होती है |
हम पवित्र आत्मा का अध्यन कर रहें है , इन्हें हम तीन ग्रुप में बाँट सकतें हैं
पहला ग्रुप- प्रेम, आनंद और शांति, ये हमारे जीवन में परमेश्वर और मनुष्य के संबंधो के महत्त्व से सम्बंधित है| ऐसा हरगिज़ नहीं हो सकता कि तुम कहो कि मैं परमेश्वर से प्रेम करता हूँ और मनुष्य से घृणा करो | इसको ध्यान से सोचो, कि तुम उससे घृणा करते हो जिससे परमेश्वर सबसे अधिक प्रेम करता है?
दूसरा ग्रुप- धैर्य, दयालुता और भलाई, ये हमारे सामाजिक गुणों से सम्बंधित हैं | यह हमारे विचार और कार्यों से सम्बंधित हैं कि हमारा दृष्टिकोण दूसरों के प्रति कैसा है|
तीसरा ग्रुप- विश्वास, नम्रता और आत्म नियंत्रण, यह हमारी ज़िम्मेदारी से सम्बंधित है, हम अपने किये के लिए परमेश्वर के सामने ज़िम्मेदार हैं |
चलो, युसूफ के बारे में पढ़ते हैं, उसके पास धैर्य का स्तर अद्भुत तरीके से था
पढ़ें उत्पत्ति 37:1-11, 12-36
39:10, 17-18, 20,
40:4, 41:46-47
17 से 30 वर्ष की उम्र में उसके जीवन में बहुत सारी चीजे हुईं
1.      परमेश्वर ने उसे महान होने का स्वप्न दिया
2.      उसके भाई उससे ईर्ष्या रखते थे
3.      उन्होंने उसे मरने की कोशिश की
4.      उसे एक व्यापारी को बेच दिया गया
5.      बाद में उसे मिश्र देश के व्यापारी को बेच दिया गया
6.      उसके मालिक की पत्नी ने उसे व्यभिचार करने के किये उकसाया
7.      उस पर झूठा आरोप लगाया गया
8.      उसे जेल में डाल दिया गया
9.      जेल में भी वह आशीषित हुआ
10.     उसे वहां पर राजा के अधिकारीयों का सेवक बना दिया गया
11.     उसने राजा के स्वप्न का मतलब बताया
12.     उसे प्रधान मंत्री के पद पर बैठाया गया
जब हम कठिन परिस्थितियों से गुजरतें हैं तो सिर्फ अकेले विश्वास से काम नहीं बनाता है, हमें धैर्य की भी ज़रुरत पड़ती है |
अगर तुममे धैर्य नहीं तो तुम अचल कैसे रहोगे, और इस तरह अपने गंतव्य स्थान तक पहुँचने में देर कर दोगे |
पढ़ें 2 कुरंथियों 6:4-6, परन्तु हर एक बात में परमेश्वर के योग्य सेवकों के सदृश्य अपने आप को प्रस्तुत करते है, अर्थात बड़े धैर्य में, क्लेशों में अभावों में, संकटों में, मार खाने में, बंदी किये जाने में, उत्पातों में, परिश्रम में, जागने में, भूख में पवित्रता में, ज्ञान में, धीरज में कृपालुता में पवित्र आत्मा में, सच्चे प्रेम में,...
धैर्य का मतलब हैं परीक्षा की घडी में परमेश्वर पर विश्वास करना
पढ़ें याकूब 5:7, इसलिए हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धैर्य रखो| देखो कृषक भूमि की मूल्यवान उपज के लिए प्रथम और अंतिम वर्षा होने तक धैर्य बांधे ठहरा रहता है |
अगर तुम बोने और काटने के सिद्धांत पर विश्वास करते हो, तो अपने विश्वास का अभ्यास करो और परमेश्वर को बाकि काम करने दो|
याद रखो तुम अपनी सामर्थ में कुछ भी नहीं उगा सकते हो| यह परमेश्वर है जो परदे के पीछे काम करता है | उसका पवित्र आत्मा तुम्हारी मदद करता है |
परमेश्वर को पकडे रहो उसके आगे रो,, उस पर भरोसा करो, अपनी तकलीफे बताओ, परमेश्वर के पास तुम्हारे लिए जवाब है
पढ़ें 2 कुरंथियों 6:2, क्योंकि वह कहता है, "गृहण किये जाने के समय मैंने तुम्हारी सुन ली, और उद्धार के दिन मैंने तुम्हारी सहायता की | देखो अभी गृहण किये जाने का समय है,| देखो अभी वह उद्धार का दिन है|
आज तुम्हारा नियत समय है, आज तुम्हारी चंगाई का दिन है, आज तुम्हारे उद्धार का दिन है इसलिए अपना सब उसे दे दो और उस पर भरोसा करो |
प्रार्थना -गलातियों  6:9, के अनुसार हम भलाई करने में निरुत्साहित ना हो, क्योंकि यदि हम शिथिल ना पड़े तो उचित समय पर कटनी काटेंगे |
प्रिय हमारे स्वर्गीय पिता, यीशु के नाम पर, हमारी मदद करें ताकि हम आपके साथ चल सके, आपको और अधिक जान सकें, आपमे और अधिक दृढ हो सके, और सिर्फ आप पर भरोसा करने वाले हो सके| पिता हमे धैर्य दे ताकि कठिन समय में हम दुर्बल ना हो, और सदैव जाने कि आप हमेशा परदे के पीछे हमारे लिए काम कर रहें है|
अमीन  (Gobible.org)

Wednesday, June 8, 2016

आनंद मेरा विकल्प है

जब खुशी पहुँच से बाहर हो और समस्याओं का वजन नीचे दबा रहा हो, तो मैं यीशु के पास भागती हूँ, तुम कहाँ जाते हो?
मैं अब भी उस समय को याद करती हूँ जब मेरी खुशीयां चोरी हो गई थी और मैं मुस्करना भी भूल गई थी. मैंने सभी धर्मों में परमेश्वर को खोजा लेकिन वह कहीं नहीं मिला. मैंने पूरी तरह से परमेश्वर में अपना विश्वास खो दिया था | जीवन मेरे लिए एक बोझ बन गया था लेकिन मैं अपने बीमार पति जो अपने L4 और 5 की पीठ की हड्डियों के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण बिस्तर पर थे और 80% स्मृति खो चुके थे, और मेरे 9 साल के बच्चे के लिए मेरा जीना ज़रूरी था.
मुझे नहीं पता था कि खुशियाँ भी कहीं पायीं जा सकती थीं, मेरे लिए जीवन असफल हो चुका था और मौत जीत रही थी| चूकि  मेरे ऊपर परिवार का उत्तरदायित्व था इसलिए मैं जी रही थी पर बिना उम्मीद के
दिल के भीतरी कोने में फिर भी एक उम्मीद छुपी थी और वह थी कि कहीं ना कहीं अवश्य ही अच्छाई छिपी है, कि कहीं ना कहीं अवश्य ही प्रकाश छिपा है, कि कहीं ना कहीं अवश्य ही सच्चाई छिपी है, कि कहीं ना कहीं अवश्य ही समाधान छिपा है | मेरे पास एक प्रश्न था कि थोड़ी सी ही सही पर शांति कहाँ मिलेगी, कि थोड़ी सी ही सही पर ख़ुशी कहाँ मिलेगी, कि थोड़ी सी ही सही पर राहत कहाँ मिलेगी?
क्या जीवन बहुमूल्य है?
क्या परमेश्वर वास्तव में सुनता है?
उसने मनुष्य को क्यों बनाया?
मैं कहाँ जा रही हूँ स्वर्ग या नरक या बीच में कहीं?
मेरे पास बहुतेरे प्रश्न थे, मुझे डरावने सपने क्यों आतें हैं?
मैं इस तरह क्यों तकलीफ पा रही हूँ?
परमेश्वर क्यों नहीं मेरी मदद को आतें है ? लेकिन इन बातों का कोई भी जवाब ना था |
फिर एक दिन जब मैं यीशु के पास आयी मेरे दिल की आवाज़ सुनी गई,
मुझे वह लम्हा इतना पसंद है जब मैंने यीशु को जाना. उसके शब्द कहते है, "मुझे पुकारोगे तो मैं जवाब दूंगा |"
मैंने उससे पूछा क्या तुम परमेश्वर हो?
क्या तुम मेरी मदद करोगे?
क्या तुम मुझे शांति दे सकते हो?
क्या तुम मेरे पति को ठीक कर सकते हो? मैंने उससे कहा अच्छा मैं तुम्हें परखती हूँ |
मैंने उससे कहा, "मेरे पाप क्षमा कर दो, मेरे पुरखों के पाप क्षमा कर दो, मैं विश्वास करती हूँ कि तुम मेरे कारण आये, मेरे कारण मरे और मेरे ही कारण फिर जी उठे, और अब तुम पिता के दाहिने हाथ में स्वर्ग में बैठे हो | तुमने मेरे सभी पाप माफ़ कर दिए हैं | शैतान का मुझ पर कोई अधिकार नहीं हैं | मैं परमेश्वर की संतान हूँ |" मैंने महसूस किया कि मेरी आत्मा में शान्ति थी|
पिछले हफ्ते मैं एक कंप्यूटर इन्जिनीयर जो कि दक्षिण अफ्रीका से था मिली |वह दोपहर के समय में पिए हुए था| मुझे आत्मा में लगा कि मैं उससे पूछूं तो मैंने उससे पूछा कि वह शराब क्यों पिए हुए है ? वह मुस्कराया बोला, मेरी बहुत सारी समस्याएं है कोई भी मेरी मदद नहीं कर सकता है |
मैंने कहा, हाँ ये बात सही है मैं तुम्हारी कोई भी मदद नहीं कर सकती हूँ लेकिन परमेश्वर कर सकता है |
वह फिर मुस्कराया और बोला, परमेश्वर कत्तई नहीं! मैं कथोलिक इसाई था लेकिन अब मैं मुसलमान हूँ, फिर भी मेरी समस्या का कोई समाधान नहीं हैं, कम से कम शराब तो मुझे थोड़ी देर के लिए समस्याओं से दूर ले जाती है |
मैंने अपनी गवाही देने की कोशिश की, उसने कुछ सुनी कुछ नहीं | बातचीत होती गई, अंत में मैंने उससे पूछा क्या मैं तुम्हारे साथ प्रार्थना कर सकती हूँ?
उसने जवाब दिया मैडम, वह कैसे मेरी मदद कर सकता है?
मैंने फिर अपने प्रश्न को दोहराया, उसने कहा ठीक है, प्रार्थना के अंत में वह रोने लगा, फिर वह बोला, मेरे दिल में सुकून है, मुझे आपकी प्रार्थना की ज़रुरत है |
मैंने उससे कहा, जो भी तुम्हारे जीवन में हो रहा है यीशु को बताओ | उस शाम को मुझे उसका एक मेसेज मिला, उसने लिखा, आज मैं बहुत आज़ाद महसूस कर रहा हूँ, जैसे कि हवा में अणु हों |
यहाँ पर मैं आनंद से भर गई| जब भी परमेश्वर किसी के जीवन में काम करते है मुझे बहुत शांति मिलाती है जैसे मेरी प्यास बुझ गई हो
पढ़ें लुका 6:45
वह व्यक्ति, वही आनंद और शांति बोल रहा था जो उसके अन्दर भरा हुआ था
तुम्हारा आनंद कहाँ है?
क्या तुम्हारा आनंद सांसारिक वस्तुओं में है?
पढ़ें नहेमयाह 8:10
आनंद क्यों आवश्यक है?
क्या उससे ताकत मिलती है?
फिर ख़ुशी क्या है, क्या ख़ुशी और आनंद एक ही बात है?
आजमाइश के बीच में बनी रहने वाली स्थिति आनंद है जबकि ख़ुशी भावनात्मक स्थिति है
याकूब 1:2
लोग जीवन से संघर्ष करते है क्योंकि उन्होंने अपना आनंद खो दिया है
शुद्ध आनंद ख़ुशी नहीं हैं , अगर आपमें आनंद का आभाव है तो ताकत भी ना रहेगी
गीत है प्रभु का आनंद है मेरी ताकत.......
तब जब आनंद ना होगा तो हम परिस्थितियों से मुकाबला कैसे करेंगे
आनंद हमे परिस्थितियों से लड़ने की ताकत देता है, और जब तुम मुकाबला करोगे तभी तो जयवंत होगे
पढ़ें 1 युहन्ना 4:4,
बोलो- परीक्षाओं से हमे विजय मिलती है कुंठा नहीं
पढ़ें गलातियों 5:22-23
आनंद भी पवित्र आत्मा का फल है, यह भी एक विकल्प है |
इसका अनुभव तब मिलता है जब हम अपने को जैसे हैं वैसा स्वीकार करते हैं, जब हम बिना लालच के दूसरे की भलाई करते है, जब हम पक्षपात रहित हो, जब हम स्वार्थी ना हो और अपनी कठिन परिस्थितियों में भी अडिग खड़े रहें
पढ़ें हबक्कूक 3 :17 -18
क्या तुम अपनी परिस्थितियों से हार रहें हो या फिर उनके विरूद्ध खड़े हो रहें हो
पढ़ें हबक्कूक 3 :19
अगर तुम कठिन परिस्थितियों में भी अडिग खड़े रहो तो परमेश्वर तुम्हारे लिए नया रास्ता अवश्य ही खोल देगा
तुम हार के लिए नहीं बल्कि विजय के लिए हो
क्या परमेश्वर ने तुम्हारे लिए बुरी वस्तुएं रखी है
पढ़े भजन संहिता 84:11
यह वचन कहता है कि परमेश्वर कभी भी अच्छी चीजे अपने प्यार करने वाले से नहीं छुपता है
अब चुनाव तुम्हारा है कि तुम
विजय
या हार में से किसे अपनाते हो?
विजय या हार एक व्यक्ति के बर्ताव में छुपी है
तुम्हारे जीवन में कैसी भी समस्या हो सकती है, परिवार सम्बंधित, धन सम्बंधित, बीमारी सम्बंधित, हो सकता है कि कुछ भी अच्छा ना हो रहा हो ? क्या फिर भी तुम आनंदित हो?
अगर तुम्हारा आनंद परमेश्वर से है तो यह संभव है
पढ़ें यशायाह 12:2-3,
इस वचन को ध्यान से पढ़े परमेश्वर ने हमारी ज़रूरतों के कुएं दिए है | कुए से मतलब है कि असीमित प्रावधान, आपको कितना चाहिए ले लो
अगर तुम्हारी ज़रुरत चंगाई है तो चंगाई के कुएं के पास जाओ
अगर तुम्हारी ज़रुरत धन है तो धन के कुएं के पास जाओ
अगर तुम्हारी ज़रुरत शांति है तो स्वस्थ मन के कुएं के पास जाओ
अगर तुम्हारी ज़रुरत परिवार में शांति है तो संबंधों की बहाली के कुएं के पास जाओ
प्रिय मित्रों कुएं से पानी निकालने के लिए जिस ताकत की बात यशायाह कर रहा है वह आनंद है | अगर आनंद nahi है तो उसका विलोम क्या है? और अगर मन उदास है तो परमेश्वर के उद्धार से तुम क्या पाओगे?
बिना आनंद के तुम्हें कुछ ना मिलेगा
इसलिए प्रिय हतोत्साहित ना हो,
परमेश्वर का विरोधी अर्थात शैतान तो चाहेगा कि तुम आनंदित ना हो, क्योंकि वह तुम्हारा भी विरोधी है
यीशु ने कहा शैतान चुराने, नष्ट करने और मरने के लिए है पर मैं आया ताकि तुम जीवन पो और वह भी भरपूर
इसलिए
आपका विकल्प क्या है
कह दो शैतान को कि तुम मेरा आनंद नहीं छु सकते हो
यदि तुम परमेश्वर के हो तो तुम पवित्र आत्मा के हो
यदि तुम पवित्र आत्मा के हो तो तुम उसके गुणों वाले हो
फिर शैतान तुम्हारे आनंद को नहीं चुरा सकता है
इसका मतलब है कि तुम आशीषित हो इसलिए अपने आशीषों को अपने जीवन में देखना शुरू कर दो
आमीन

Tuesday, June 7, 2016

बुरे सपनों का सामना कैसे करें

अयूब की पुस्तक से हमें पता चलता है कि कुछ समय के लिए परमेश्वर ने उसे शैतान के हवाले कर दिया था और उसे बुरे सपनों और घोर कष्ट का सामना करना पड़ा.
पढ़ें - अयूब  7 :13-14
जब जब मैं सोचता हूं कि मुझे खाट पर शान्ति मिलेगी, और बिछौने पर मेरा खेद कुछ हलका होगा;
तब तब तू मुझे स्वप्नों से घबरा देता, और दर्शनों से भयभीत कर देता है;
शैतान की ओर से दिखाए गए स्वप्न दिल को ठेस पहुँचाने वाले, मन को दुखी करने वाले, सताव  देने वाले जीवन पर चोट करने वाले, सम्बन्धो को हिलाने वाले, मन को भटकाने वाले, गलत इच्छा जगाने वाले, और क्रोध को भड़काने वाले होते हैं.
शैतान हमेशा हमें कुछ सत्य बता कर या दिखा कर भ्रमित कर देता है, यही उसकी चाल है. इसलिए हमेशा जब शत्रु स्वप्न में हमें पूरी तरह भ्रमित कर दे तो हम परमेश्वर की ओर भागे
पढ़े - रोमियों 8 : 1
सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं।
हमें अवश्य ही ये बोलना है कि मसीह येशु में हमें दण्ड की आज्ञा नहीं है I हम येशु के लहू से ढकें हैं ।
दुःस्वप्न क्यों आतें हैं
हमारे विश्वास को कमज़ोर करने के लिए
भयभीत करने के लिए
बीते समय की गलतियों को थोपने के लिए
सताने के लिए
धमकाने के लिए
बहकने के लिए
हमारी इच्छा में हेर-फेर करने के लिए
हमारे निर्णय को बदलने के लिए
परमेश्वर और हमारे रिश्ते को कमज़ोर बनने के लिए
इसलिए ज़रूरी है कि हम उस स्थिति से येशु के नाम से  युद्ध  करें और प्रभु की शांति को स्थापित करके ही फिर सोएं. बुरे स्वप्नों को येशु मसीह के नाम पर खंडित कर दें.
अगर ऐसा करने में आप अपने आप को असमर्थ पातें है तो पवित्र आत्मा से प्रार्थना करें कि वह आपको सपना देखते समय याद दिलाएं.
एक बात आप अवश्य जानें कि येशु का नाम और उसका लहू हमारे लिए एक भरी भरकम शस्त्र है.
दुःस्वप्न का दरवाज़ा कैसे खुलता है ?
आसान है परमेश्वर ने शैतान को अनुमति दी है
ऐसा क्यों?
हम परमेश्वर में तमाम दुष्ट ताकतों को अपने पैरों तलें रौंदने  के लिए बुलाएँ गएँ हैं
हमारे जीवन जीने के तरीकों ने दुष्ट के लिए दरवाज़ा खोल दिया है।
अच्छा हो हम अपने आप को पहचाने और पश्चाताप करें और परमेश्वर की ओर खिंच जाएँ।
अवश्य जानें जहाँ एक ओर शैतान अपनी इन चालों से हमें निराश करने की कोशिश कर रहा है वहीँ परमेश्वर
इन्हे हमारे जीवन में घुसने की  परमिशन देता है ताकि हम बढ़ सकें अपने शत्रु को जीत सकें।
हम अन्त दिनों की ओर जा रहें हैं जो दुष्ट हैं वो अति दुष्टता की ओर, फिर सोंचो जो परमेश्वर से प्रेम करने वाला है उसे तो वे अपशब्द-श्राप वचन बोलेंगे।
ऐसे में रात 12 से सुबह 3 का समय हमारी फाइट का समय हो जाता है।
इसलिए नींद पर अपना अधिकार लो और जो दुष्ट योजना आपके जीवन  या परिवार के लिए भेजी गयी है उसे येशु के नाम पर नष्ट कर दो।
अपने जीवन को परमेश्वर के वचन के अनुसार काबू करने  वाले बनो
पढ़ो - 1. प्रकाशित वाक्य 21 :6 - 8
फिर उस ने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 7 जो जय पाए, वही इन वस्तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा। 8 पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्हों, और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है॥
पढ़ो - 2. रोमियों 12 :21
 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो॥
पढ़ो - नीतिवचन 3 :24
24 जब तू लेटेगा, तब भय न खाएगा, जब तू लेटेगा, तब सुख की नींद आएगी।
पढ़ो - 3. यिर्मयाह 31 : 26
26 इस पर मैं जाग उठा, और देखा, ओर मेरी नीन्द मुझे मीठी लगी।
जब हम परमेश्वर की इच्छा के विरोध में चलते है तब हम शैतान के लिए दरवाज़ा खोल देतें हैं।
कैसे जानें ?
 जब हमारी सोंच दूषित हो प्रेरितों के काम 24:16
 जब हम अपने व्यवहार के कारण  शैतान को मौका दे देतें हैं की वह हमारे विरोध में बोले
जब हम अपनी पसंद को प्राथमिकता देतें हैंऔर संदेह करते है  रोमियों 14 :23
जानबूझ कर किया गया पाप परमेश्वर की सुरक्षा की दीवार  हटा देता है
जब हम ऐसा मनोंरंजन देखना पसंद करें जो हिंसक या कामुक हो यशायाह 33 :15 -16
जब हम अपनी आँखों को वश में न रखें मत्ती 6: 22 -23
जब हम बुरी खबर पर विश्वाश करें  नीतिवचन 11 :27
जब हम माफ़ न करें  मत्ती 18 :34 -35
धोखे और चेतावनी देने वाले स्वप्न
एक बार चर्च की एक महिला मेरे पास आई और बोली कि  मैंने सपने में देखा कि  मेरे पडोसी की मृत्यु हो गयी।  मुझे लगा कि  मैं अवश्य उसे बता दूँ  ताकि वो येशु को अपना ले और उसके प्राण बच जाएँ। लेकिन जब मैं उसके घर गयी और उसे बताया की वह मरने वाली है वह और उसका पति मुझसे काफी गुस्सा हो गए और कहा कि मैं उनके घर न आया करूँ।
उसने मुझसे पुछा ऐसा क्यों हुआ कि परमेश्वर ने दिखाया पर वह तो अभी तक ज़िंदा है ।
इसके लिए मेरे पास एक ही जवाब है - अच्छा हो कि हम इन विषयों के लिए प्रार्थना करें न कि उन्हें ऐसा बताएं।
हम परमेश्वर की इच्छा उसकी मर्ज़ी को बोले न की शैतान की मर्ज़ी को।
पढ़ें - 1 थिस्लिनिकियों 5 :8 -10
धोखे के सपनों पर विश्वास
बहुत से ऐसे विश्वासी है जो परमेश्वर द्वारा दिखाए या शैतान द्वारा दिखाए गए सपनों का अंतर नहीं समझ पातें है और धोखे का शिकार हो जातें हैं।
परमेश्वर शांति का परमेश्वर है और शैतान भय उत्पन्न करने वाला।  इसलिए भय में नहीं बल्कि परमेश्वर के वचन में विशवास करो जो चाहता है कि  हममें से कोई भी नष्ट न हो बल्कि सब परमेश्वर को जानने वाले हों।
परमेश्वर के वचनों को अपने दिल में बिठा लो
अच्छा हो अपना फोकस शैतान और उसकी योजनाओं पर से हटा लोऔर बुराई को भलाई से जीतो।
यिर्मयाह 29 :10 -12
11 क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएं मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानि  की नहीं, वरन कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूंगा।
12 तब उस समय तुम मुझ को पुकारोगे और आकर मुझ से प्रार्थना करोगे और मैं तुम्हारी सुनूंगा।
अमीन 

Thursday, February 14, 2013

प्रेम एक भावना नहीं यह एक विकल्प है

यदि हम उत्पत्ति 1:28 और 31 पढ़ें तो पता चलता है कि परमेश्वर ने आदम और हवा को आशीषित किया और जो भी परमेश्वर ने रचा वह सब अच्छा था |
इसका मतलब है कि जो कुछ भी परमेश्वर ने रचा वह पवित्र था, अमर था और आशीषित था 
लेकिन उत्पत्ति 3:6 और 7 से पता चलता है कि पहले मनुष्य और उसकी स्त्री ने पाप किया और उसके फल स्वरुप परमेश्वर का प्रेम प्रकट हुआ |
हैं न चौकाने वाली बात!
परमेश्वर ने इस पृथ्वी को शापित कर दिया और मनुष्य को कठिन परिश्रम व अपने पर्यावरण की देख भाल एक ट्रेनिंग के तौर पर दे दी, जिससे कि उसके उद्धार की योजना  फलान्वित हो सके, क्योंकि "मनुष्य का प्रेम स्वार्थी हो गया था |"
परमेश्वर ने अपना पुत्र यीशु हमारे लिए दिया, जो कि हमारा चंगा करने वाला और उद्धारक है 
उसके कार्य ने उसके दैविक अभिषेक को सिद्ध कर दिया 
उसके हर कार्य में प्रेम, करुना और अनुराग स्पष्ट दिखाई दिए 
उसी पुत्र ने हमे अपनी पवित्र आत्मा दी और हमें अपना निवास स्थान बना लीया 
इब्रानियों 13:8 कहता है कि यीशु मसीह जैसा कल थ, वही आज है और सर्वदा रहेगा 
आज यीशु का वही प्रेम, हम सबकी  ज़रुरत है 
1 कुरंथियों 6:19 कहता है कि तुम पवित्र आत्मा के मंदिर हो
क्या तुम सोचते हो कि परमेश्वर अपने राज्य के लिए तुम्हें अपने वरदान और फल देगा?
किस तरह के प्रेम को परमेश्वर प्रकट करना चाहेगा?
पढ़ें लुका 4:18,
कि प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उस ने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है, कि बन्धुओं को छुटकारे का और अन्धों को दृष्टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूं और कुचले हुओं को छुड़ाऊं।
यीशु का दिल द्रवित हुआ  
यीशु ने मनुष्य का स्वभाव लिया 
यीशु प्रेम से उनके करीब गया 
लोगों ने उसके प्रति कैसी प्रतिक्रिया की?
लोग उसके प्रति आकर्षित हुए 
लोग उसके द्वारा उत्साहित हुए 
लोगों ने उसे प्यार किया 
तुम्हारे विषय में क्या है, क्या तुम अपने शरीर को उसका मंदिर कहना चाहोगे?
पढ़ें 1 कुरंथियों 6:19-20,
क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो॥ 
मैं अपना पहले वाला प्रश्न दोहराना चाहूंगी, क्या तुम सोचते हो कि परमेश्वर अपने राज्य के लिए तुम्हें अपने वरदान और फल देगा?
हाँ! 
इसका मतलब इस शरीर के देखभाल की ज़रुरत है 
इसका मतलब है कि इस शरीर, आत्मा और प्राण के देखभाल की ज़रुरत है 
ऊपर वाला वचन कहता है कि उसने अपनी आत्मा अर्थात अपना स्वभाव हमें दे दिया है 
ठीक!
मैं तुम्हें एक उधारण देती हूँ -
जब मेरा पुत्र जन्मा तो वह कुछ मेरे और कुछ अरुण के स्वभाव को लेकर जन्मा | जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया उसके व्यवहार में हमारे व्यवहार की झलक दिखाई दी, क्योंकि वह हमारे संग-संग रह रहा था 
तुम नया जीवन पा चुके हो, परमेश्वर तुम्हारा पिता है और तुम परमेश्वर के निवास स्थान हो, इसका मतलब है कि परमेश्वर तुम्हारे संग-संग है 
अगर तुम परमेश्वर के हाथ में अपना नियंत्रण दे दो, तो तुम उसके स्वभाव के सहभागी हो जाओगे, लेकिन याद रहें- परिपक्वता एक प्रतिक्रिया है |
बोलो -  परिपक्वता एक प्रतिक्रिया है
एक पल लो और अपने आप को जांचों 
क्या तुम्हारा दिल लोगों के लिए द्रवित हुआ है?
क्या तुमने यीशु के स्वभाव को ग्रहण किया है?
क्या तुम्हारा दृष्टिकोण लोगों के प्रति प्रेम भरा है?
क्या तुम यीशु को तुम्हें अपने स्वभाव में रूपांतरित करने की अनुमति दोगे?
बोलो - हाँ! परमेश्वर अनुमति है 
उसका स्वभाव कैसा है?
पढ़ें गलातियों 5:22-23,
पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। 
मैंने अपने पिछले सन्देश में नौ नहीं बल्कि पवित्र आत्मा के बारह फल का जिक्र किया था 
पढ़ें प्रकाशित वाक्य 22:1-2,
फिर उस ने मुझे बिल्लौर की सी झलकती हुई, जीवन के जल की एक नदी दिखाई, जो परमेश्वर और मेंम्ने के सिंहासन से निकल कर उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी। और नदी के इस पार; और उस पार, जीवन का पेड़ था: उस में बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति जाति के लोग चंगे होते थे। 
फिर 
पढ़ें यहेज़केल 47:9-12,
और जहां जहां यह नदी बहे, वहां वहां सब प्रकार के बहुत अण्डे देने वाले जीव-जन्तु जीएंगे और मछलियां भी बहुत हो जाएंगी; क्योंकि इस सोते का जल वहां पहुंचा है, और ताल का जल मीठा हो जाएगा; और जहा कहीं यह नदी पहुंचेगी वहां सब जन्तु जीएंगे।
10 ताल के तीर पर मछवे खड़े रहेंगे, और एनगदी से ले कर ऐनेग्लैम तक वे जाल फैलाए जाएंगे, और उन्हें महासागर की सी भांति भांति की अनगिनित मछलियां मिलेंगी।
11. परन्तु ताल के पास जो दलदल ओर गड़हे हैं, उनका जल मीठा न होगा; वे खारे ही रहेंगे।
12. और नदी के दोनों तीरों पर भांति भांति के खाने योग्य फलदाई वृक्ष उपजेंगे, जिनके पत्ते न मुर्झाएंगे और उनका फलना भी कभी बन्द न होगा, क्योंकि नदी का जल पवित्र स्थान से निकला है। उन में महीने महीने, नये नये फल लगेंगे। उनके फल तो खाने के, ओर पत्ते औषधि के काम आएंगे। 
दो भिन्न पुस्तकों में से इन वचनों को पढ़ने के बाद यह निश्चित हो जाता है कि परमेश्वर हमारे शरीर और स्वभाव के प्रति चिंतित है और उसके स्वभाव के बारह अलग-अलग स्वाद है 
क्या तुम परमेश्वर के स्वभाव को खोजने के लिए तैयार हो?
चलिए हम प्रेम से शुरुआत करते है 
 पढ़ें 1 थिस्सलुनीकियों  4:9
किन्तु भाईचारे की प्रीति के विषय में यह अवश्य नहीं, कि मैं तुम्हारे पास कुछ लिखूं; क्योंकि आपस में प्रेम रखना तुम ने आप ही परमेश्वर से सीखा है।
कौन तुम्हें प्रेम सिखाएगा?
बोलो - परमेश्वर स्वयं 
आज के सामाज में प्रेम शब्द का दुरूपयोग होता है 
इस शब्द की हम इस तरह व्याख्या कर सकते है 
1. परमेश्वर का प्रेम-अनुराग जो बिना शर्त है 
2. पति-पत्नी का प्रेम-लगाव जो एक दूसरे के प्रति है 
3. पारिवारिक प्रेम जो परिवार के सदस्यों में होता है 
4. आपसी-प्रेम जो भाई-चारे या मैत्रीपूर्ण है 
इसके अतिरिक्त प्रेम अपवित्र है 
अब कौन है जो तुम्हें प्रेम सिखाएगा?
बोलो-पवित्र आत्मा
याद रहें 
वरदान दिए जातें है लेकिन फल विकसित होतें है 
अगर तुम एक फल का पौधा लगाना चाहो तो तुम क्या करोगे?
1. एक फल का चुनाव करोगे 
2. उसके लिए एक स्थान निर्धारित करोगे 
3. मिटटी की गुडाई करोगे 
4. पौधा लगाओगे 
5. जमीन सोफ्ट और गीली रखोगे 
6. उसका रखरखाव या ध्यान रखोगे 
इसका मतलब है पौध लगाने के पहले तुम छाटोगे और फिर चार से पांच साल तक उसकी देखभाल करोगे 
उसके बाद उस फल के पौधे का रूप दिखाई देगा 
इससे यह स्पष्ट पता चलता है कि परिपक्वता एक रात में नहीं आती, जैसे एक पेड़ का फल एकदम से नहीं बनाता उसी तरह एक व्यक्ति का गुण भी परिपक्व होने में समय लेता है 
यीशु ने मनुष्य के चरित्र के बारे में कहा 
पढ़ें मत्ती 7:16-20
उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोग क्या झाडिय़ों से अंगूर, वा ऊंटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं? इसी प्रकार हर एक अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है। अच्छा पेड़ बुरा फल नहीं ला सकता, और न निकम्मा पेड़ अच्छा फल ला सकता है। जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में डाला जाता है। सो उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे।
मैं तुमसे प्यार करता हूँ यह कहना जितना सरल है, किसी को प्रेम करना उतना ही कठिन है 
ध्यान से सुनो और जांचों 
1. परमेश्वर के प्रति हमारा प्रेम प्रदर्शन 
पढ़ें मालाकी 3:8, 
अगर तुम परमेश्वर को दे नहीं सकतें हो तो तुम्हें परमेश्वर पर भरोसा नहीं है, फिर परमेश्वर के प्रति तुम्हारा प्रेम कहाँ है? 
2. लोगों के प्रति हमारा प्रेम प्रदर्शन 
जब कोई व्यक्ति तुम्हारी मर्जी के विपरीत और तुम्हें अपशब्द कहें, तुम भड़क पड़ते हो, तुम्हारा लोगों के प्रति प्रेम कहाँ गया?
यीशु ने पिता से उसे पीढ़ा पहुचाने वालों को माफ़ कर देने को कहा 
3. पवित्र आत्मा के प्रति हमारा प्रेम प्रदर्शन 
पढ़ें गलातियों 5:19-21, 
कितनी बार दूसरो को आगे बढ़ता देख कर तुम्हारा दिल ईर्ष्या से भर जाता है, क्या तुम भूल गए कि तुम पवित्र आत्मा का मंदिर हो? 
2 राजा 18:30-38, में एलिया ने वेदी को पूरी तरह पानी से भिगो दिया लेकिन उसने जैसे ही परमेश्वर को आवाज़ लगाई स्वर्ग से आग उतरी और सब जला गई |
आज फिर उसी आग की हमें ज़रुरत है
आग जो हमारे चरित्र से सब कुछ जो अशुद्ध है जला दे 
जब अशुद्ध जल जायेगा बीमारियाँ भाग जायेंगी, तकलीफें भाग जायेंगी 
तब तुम पवित्र आत्मा का पवित्र मंदिर होगे 
जिसके हाथ लोगों को चंगाई देंगे 
जिसकी उपस्थिति लोगों को आशीषित करेगी 
अपने स्थान पर खड़े हो, 
परमेश्वर तुम्हे प्रेम सिखाना चाहता है 
क्या तुम प्रेम सीखने के लिए तैयार हो?
क्या तुम प्रेम को एक विकल्प बना रहें हो 
चलो प्रार्थना करें 
पिता परमेश्वर, होने पाए कि मैं आप के प्रेम से भर जाऊं  इसलिए मेरी मदद करें, ताकि मैं अच्छे फल धारण कर सकूं, मेरी मदद करें ताकि मैं अच्छे और बुरे फल को परख सकूं और मुझमें परमेश्वर का बिना शर्त वाला अनुराग बह सके प्रभु यीशु के नाम पर|
आमीन

Saturday, February 2, 2013

एक बेहतर समाधान


छमाही के इम्तिहान के बाद जब हम लोग रिपोर्ट कार्ड्स बना रहें थे, एक प्राइमरी की टीचर से रिपोर्ट कार्ड भरने में कुछ गलती हो गयी, प्राइमरी के प्रिंसिपल ने उससे कहा पूरे रिपोर्ट कार्ड्स बाहर से फोटोकॉपी कराओ और फिर से भरो| यह उसके लिए काफी मुश्किल काम था, उसने शिकायत की कि उसे नहीं पता था कि इस कॉलम में टिक नहीं करना था  |
इस पूरे किस्से में मुझे यह याद  है कि वह इस बात पर बहुत कटु, क्रोधित और हताश सी हो गयी थी |
अच्छा होता यदि प्राइमरी के प्रिंसिपल ने सफ़ेद-इंक सोलुशन का प्रयोग किया होता!
तुम क्या करोगे यदि कोई तुम्हारे प्रति गलत करे?
पढ़ें मत्ती 6:12,14-15
और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।
परमेश्वर ने हम सबको एक बेहतरीन सफ़ेद-इंक दे रखी है
यह यीशु मिलेनियम उत्पादन है
उसने तुम्हें और मुझे मुफ्त में दिया है | इस उत्पादन का ब्रांड नाम “क्षमा” है| वह हमारी गलतियों पर उसका प्रयोग करता है और चाहता है कि हम भी उसका प्रयोग दूसरों की गलतियों पर करें | लेकिन कई बार हम इसका प्रयोग करने में असफल हो जातें हैं, और गलतियों को जबरदस्ती ब्लेड या फिर रबर से छुड़ाने की कोशिश करतें है, जिसके फलस्वरूप दाग पड़ जाता है
लेकिन सफ़ेद इंक एक अच्छा समाधान है, यह हमारी गलतियों को छिपा देगी और सफ़ेद जगमगाहट के साथ हमारी की गयी गलतियों से अनजान भी ना रखेगी
बोलो - मैं अपनी बीती हुयी गलतियों से अनजान नहीं हूँ
बोलो - सफ़ेद इंक एक बेहतर समाधान है
हमेशा मैं अपने छात्रों को यहाँ-वहां गलतिया करते हुए देखती हूँ, अगर हम इनका विश्लेषण करे, तो हमे स्पष्ट रूप से 3 विभिन्न स्तर दिखाई देतें है
1.   उन्होंने गलतियाँ की क्योंकि वे अभी परिपक्व नहीं हुयें है
2.   उन्होंने गलतियाँ की क्योंकि उनका पालन पोषण ठीक तरह से नहीं हुआ है
3.   उन्होंने गलतियाँ की क्योंकि वे यह स्कूल छोड़ कर जा रहें थे
जब भी कभी कुछ भी मेरे जीवन में होता है या फिर मेरे इर्द-गिर्द होता है, मैं तुरंत और सदैव समय लेती हूँ और छात्रों के जीवन के जरिये जीवन के पैटर्न का अध्यन करने लगती  हूँ. परमेश्वर का राज्य किसी स्कूल से कम नहीं है.
बोलो - मैं सीख रहा हूँ
बोलो - सफ़ेद इंक एक बेहतर समाधान है
जीवन का हर एक्शन मनुष्य के जीने की आतंरिक और बेसिक ज़रुरत पर निर्भर है, जो कि वास्तव में आत्म-प्रेम है |
अपने पास बैठे व्यक्ति से पूछो, तुम अपने को कितना प्यार करते हो?
बहुत बार जब हम अपने बीते हुए पल को देखते है तब सोचते है कि क्या अच्छा होता जो मुझे इन बातों का ज्ञान होता, तो मैं इनके साथ इस तरह ना करता
इस दृष्टिकोण से क्या तुम बोलोगे कि तुमने जो किया था वह गलत नहीं था!
बिलकुल नहीं, जो गलत है वह गलत है! लेकिन उन बातों को बताया जा सकता है, बोला जा सकता है
फिर भी, यह ज़रूरी है कि हम जाने कि हमने ऐसा क्या और क्यों किया, ताकि हम स्वयम को माफ़ कर सकें| यदि हम स्वयं को माफ़ नहीं करतें है तो हमारी अपनी उन्नति प्रभावित होती है
बोलो - यह समय बीती हुयी गलतियों के बोझे से मुक्त होने का है
बोलो - सफ़ेद इंक एक बेहतर समाधान है
हम सब सीख रहें है और बढ़ रहें है, चाहे जैसा भी हो हमारा विकास हो रहा है |हम सबके बीते हुए कल में शर्म और गलती का अहसास है| बचपन में बहुत बार हमे सजा मिली, जिसका कारण भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुआ | हम छोटे थे इसलिए पूछने की रजामंदी नहीं मिली, पर उन लम्हों ने हमारे जीवन में “गलत हो”, “बुरे हो” या फिर “अपेक्षाकृत ठीक नहीं हो” ऐसी छाप छोड़ दी
यह नकारात्मक टिपण्णी हमे अधिक चोट ही पहुचाती है जो परमेश्वर के वचनों से परे है
परमेश्वर हमें अनोखा, विशिष्ट, आशीषित और अपनी आँखों का तारा कहता है
बोलो - मैं परमेश्वर की आँखों का तारा हूं
बोलो - सफ़ेद इंक एक बेहतर समाधान है
पढ़ें रोमियो 12:17-19
बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा।
मुझे इन वचनों के दो शब्द बहुत पसंद है ये मेरे अन्दर आनंद भर देतें हैं
इन दो वचनों ने मुझे पापी से धर्मी बना दिया
ये बेहतरीन शब्द हैं “बदला” और “कोप”
क्या !! बदला और कोप, अरे ये कैसे बेहतरीन शब्द हो सकतें हैं!!
बाइबल में लिखा है कि परमेश्वर चाहता है कि हम सब उसके ज्ञान को जाने, वह चाहता है कि हम सब बच जाएँ  कभी मैं पापी थी और परमेश्वर के कोप तले थी और बहुत  तकलीफ में थी, लेकिन सोचो ये परमेश्वर का बदला और कोप ही था जो मैं उसे खोजने लगी, और उसकी सजा मुझे उसके राज्य में ले आई, इसका मतलब है कि परमेश्वर के कोप में घृणा नहीं है बल्कि बिगड़े हुए संबंधो का फिर से बनाना है | इसी कारण पौलुस ने लिखा कि बदला मत लो परमेश्वर के कोप को काम करने दो
तुम्हारा क्रोध कैसा है??? क्या ये संबंधो को जोड़ने या फिर तोड़ने वाला है ??
बोलो - परमेश्वर सक्षम है
बोलो - सफ़ेद इंक एक बेहतर समाधान है
परमेश्वर के दृष्टिकोण से - उससे कुछ भी छिपा नहीं है फिर भी वह हमेशा माफ़ कर देता है, हमारे पापों को भूल जाता है और उनका स्मरण नहीं करता है
पढ़ें इब्रानियों 8:12
क्योंकि मैं उन के अधर्म के विषय मे दयावन्त हूंगा, और उन के पापों को फिर स्मरण न करूंगा।
बोलो - परमेश्वर हमारे पापों को याद नहीं रखता है
बोलो - सफ़ेद इंक एक बेहतर समाधान है
माफ़ी से सम्बंधित 3 स्तर हैं
1.   बाहरी - हम उपरी मन से कहतें है कि माफ़ कर दो, या फिर माफ़ किया परन्तु दिल से ऐसा नहीं करते हैं
2.   भावनाओं पर आधारित - कई बार हम भावनाओं में बहकर माफ़ी मंगतें है या फिर माफ़ कर देतें है पर वास्तव में नहीं
3.   आत्मा की अगुवाई द्वारा - जब पवित्र आत्मा की अगुवाई होती है वह ही सच्चा पश्चाताप है, उसमें सदैव संबंधों का बनना है, हो सकता है कि लोगों के बीच सम्बन्ध फिर से ठीक ना हो, पर  हम और हमारा परमेश्वर फिर से एक हो जाते है
बहुत बार जब किसीसे गलतियाँ हो जाती है, लोग उसे तुच्छ समझने लागतें है जैसे वह अपराधी हैं, जैसे अब कुछ किया ही नहीं जा सकता, परमेश्वर का कोप उस पर है और वह नष्ट हो जायेगा, वह नरक में जायेगा, दुष्ट आत्माए उस पर है, वगेरह - वगेरह |
कानूनी तौर पर जब तक जज निर्णय ना दे तब तक, कटघरे में खड़े व्यक्ति को अपराधी नहीं कहा जा सकता है| इसलिए अच्छी रिपोर्ट जान लो - हमारा जज यीशु हमारे पाप माफ़ करने वाला  है
बोलो - मैं स्वर्ग के मार्ग पर हूं
बोलो - सफ़ेद इंक एक बेहतर समाधान है
याद रखो परमेश्वर के मार्ग पर चलना एक दिन में नहीं सीखा जा सकता है | यह एक यात्रा है
गलतियों के जरिये हम सीखते और बढ़तें है
हमारे सृजनहार के दृष्टिकोण से यह गलतियाँ नहीं बल्कि अनुभव है जो वह हमे दूसरो के मार्ग दर्शन के लिए देता है
पढ़ें इब्रानियों 12:1-3
इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिस ने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्ता न करके, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। इसलिये उस पर ध्यान करो, जिस ने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश होकर हियाव न छोड़ दो।
आनंदित हो क्योंकि तुम आगे बड़ रहें हो चाहे थोड़ा -थोड़ा ही क्यों ना हो
परमेश्वर का उद्धार, उसका प्यार है हमारे लिए, और उसका पवित्र आत्मा तुम्हारा मार्ग दर्शन करेगा, रक्षा करेगा, प्रेम करेगा, माफ़ करेगा और फिर प्रेम करेगा |
बोलो - परमेश्वर ने हमें एक बेहतरीन सफ़ेद -इंक दी है
बोलो - यीशु मिलेनियम उत्पादन एक बेहतर समाधान है
प्रार्थना करो माफ़ी की, माफ़ कर दो, पुराने अपराधों या गलतियों की चोटों को मिटा दो, जिन्होंने दुःख पहुचाया है उन्हें परमेश्वर के हवाले कर दो
औए अपने जीवन में भरपूर पाने के लिए तैयार हो जाओ
अमीन

Wednesday, January 30, 2013

पहला फल पवित्र है


येशु परमेश्वर का पहला फल  है और परमेश्वर की निगाह में पवित्र है| उसी के जरिये सारी मानव जाति परमेश्वर के सन्मुख पवित्र ठहरी है
प्रथम  फल  के  अध्धयन के  जरिये हम जान पातें हैं कि  प्रथम फल परमेश्वर की निगाह में  पवित्र है  
और जो भी परमेश्वर की निगाह में पवित्र है वो उसे स्वीकार कर लेता है
क्या तुम चाहते हो कि परमेश्वर तुम्हें स्वीकार करें?
हाँ
बोलो - मैं  पवित्र हूँ
परमेश्वर को हर समय   प्रथम स्थान पर रक्खो
अपनी पढाई में
अपनी दोस्ती में
अपने रिश्तों में
अपनी नौकरी में
अपने धन में
तुम जो भी करो उन सबमें
पढो मत्ती 6:33
इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।
परमेश्वर का राज्य कहाँ है?
जहाँ परमेश्वर के नियमों को माननेवाले मिलतें है
परमेश्वर केनियमों को मानने वाले कहाँ मिल सकतें है?
बोलो - मुझमें
पढो लुका 17:20-21
जब फरीसियों ने उस से पूछा, कि परमेश्वर का राज्य कब आएगा? तो उस ने उन को उत्तर दिया, कि परमेश्वर का राज्य प्रगट रूप से नहीं आता। और लोग यह न कहेंगे, कि देखो, यहां है, या वहां है, क्योंकि देखो, परमेश्वर का राज्य तुम्हारे बीच में है॥
और लुका 11:20
परन्तु यदि मैं परमेश्वर की सामर्थ से दुष्टात्माओं को निकालता हूं, तो परमेश्वर का राज्य तुम्हारे पास आ पहुंचा।
बोलो - परमेश्वर का राज्य हमारे बीच में है
पढो लैव्यव्यवस्था 23:14
और जब तक तुम इस चढ़ावे को अपने परमेश्वर के पास न ले जाओ, उस दिन तक नये खेत में से न तो रोटी खाना और न भुना हुआ अन्न और न हरी बालें; यह तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में तुम्हारे सारे घरानों में सदा की विधि ठहरे॥
परमेश्वर तुम्हें अवश्य ही आशीष देगा
पढो रोमियो 11:16
जब भेंट का पहिला पेड़ा पवित्र ठहरा, तो पूरा गुंधा हुआ आटा भी पवित्र है: और जब जड़ पवित्र ठहरी, तो डालियां भी ऐसी ही हैं।
हमारा परमेश्वर कभी न बदलने वाला परमेश्वर है
उसके सिद्धांत  कभी न बदलने वाले हैं
उसके सभी आदेश हमारे प्रावधान और बहुतायत के लिए है
परमेश्वर हमारे जीवन में सभी उत्तम वस्तुओं को देखना चाहता है
तो हम क्या करें?
हम अवश्य ही परमेश्वर के शब्दों के सत्य  का अनुसरण करें
जब हर प्रथम भाग परमेश्वर की निगाह में पवित्र है तो रोमियो  11:16 के अनुसार परमेश्वर की उपस्थिती और उसका प्रावधान हमारे शेष को भी सुरक्षित कर देगा
लैव्यव्यवस्था 23 के अनुसार इस्राइलों को आदेश दिया गया था कि वो हर फसल के मौसम की शुरुवात में परमेश्वर सामने विशेष भेंट लाएं
जनवरी का महीना हमारी फसल के मौसम की शुरुवात है 
इस भेंट को प्रथम फल बोला गया क्योंकि ये हमारे आगें आने वाले या प्राप्त  होने वाली तनख्वाह या आशीषों   का पहला हिस्सा है यानी कि आने वाले 11 महीनों का भाग, इसका मतलब है परमेश्वर हमारी कमाई की देखभाल करेगा
बोलो - प्रभु येशु हम इस भाग को आपको देतें है क्योंकि हम अपनी पूरी फसल की पैदावार  को जानते है कि वो आपके द्वारा हमें मिलती है
बोलो - हम अपना प्रथम फल आपको देतें है क्योंकि ये आपका ही है
बोलो - ये अति सुंदर पवित्र शास्त्र  का सिद्धांत है जो हमारे जीवन में परमेश्वर की संतान होने के नाते लागू होता है
बोलो - जब हम परमेश्वर को भेंट देतें है हम   कहतें  है  कि  हमारा  सब  कुछ  परमेश्वर  का  है और हम विश्वास करतें है कि परमेश्वर हमारी हर ज़रुरत को पूरी करेगा
येशु परमेश्वर का पहला फल  है और परमेश्वर की निगाह में पवित्र है| उसी के जरिये सारी मानव जाति परमेश्वर के सन्मुख पवित्र ठहरी है
पिता मैं प्रभु यीशु के नाम पर प्रार्थना करती हूँ कि प्रथम फल के सिद्धांत को जीवन में अपनाना एक तरह से परमेश्वर की सामर्थ्य और उसके प्रावधान को स्मरण करना है, और पुरे विश्व से उसका सम्बन्ध सिद्ध करना है। प्रभु हम अपना पहला फल पुरे विशवास के साथ लाते हैं और परमेश्वर को बहुतायत के लिए धन्यवाद देते है।
आमीन